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साहब! ये सड़क नहीं, ‘यमराज’ का न्योता है… क्या यही कोरबा जिले का विकास है या प्रशासनिक बेशर्मी का नमूना? गड्ढों में तब्दील हुई डबल इंजन की रफ्तार!

​कोरबा: विकास के बड़े-बड़े दावों सडक से धूल बन कर उड़ाती नजर आ रही है और पूरा मंजर जटगा से पसान तक की मुख्य ग्रामीण सड़क पर जीता जगता देखा जा सकता है। और आज लोक निर्माण विभाग (PWD) की नाकामी का जीता-जागता स्मारक बन चुकी है। यह सड़क अब राहगीरों के लिए रास्ता नहीं, बल्कि ‘मौत का जाल’ है। जगह-जगह धसी हुई सड़क, उखड़ी हुई डामर की परत और जानलेवा गड्ढों ने यहां के सफर को खौफनाक बना दिया है।

​सत्ता का ‘इंजन’ फेल, जनता बेहाल :- 

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​हैरानी की बात है कि प्रदेश में ‘डबल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद, जिले के अंतिम छोर पर बसे पसान क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण लाइफलाइन सडक कागजों पर तो चमक रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में गड्ढों और धूल डामर की मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। क्या सरकार की विकास योजनाएं केवल होर्डिंग्स और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं?

​PWD की ‘कुंभकर्णी’ नींद पर सवाल :- 

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​लोक निर्माण विभाग की कार्य पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर विभाग और उसके जिम्मेदार अधिकारी किस हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

• ​न पैचवर्क, न पुनर्निर्माण: सड़क की मरम्मत को लेकर विभाग पूरी तरह निष्क्रिय है।

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• ​अधिकारी नदारद: जनता चिल्ला रही है, पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर धूल फांकना गवारा नहीं समझा।

• ​एम्बुलेंस का रास्ता बंद: सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि बीमारों को ले जाने वाली एम्बुलेंस भी यहां हिचकोले खाती है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों की जान पर बन आती है।

“यह सड़क नहीं, हमारी किस्मत के गड्ढे हैं। प्रशासन शायद तभी जागेगा जब यहाँ कोई बड़ी लाश गिरेगी।” आक्रोशित ग्रामीण ​जनप्रतिनिधि मौन, जनता में उबाल ​चुनावी समय में हाथ जोड़ने वाले जनप्रतिनिधि आज इस बदहाली पर चुप्पी साधे बैठे हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और रोजाना आने-जाने वाले सैकड़ों लोग डर के साये में सफर कर रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांग स्पष्ट है तत्काल मरम्मत शुरू करो, वरना आक्रोश की आग प्रशासन को भारी पड़ेगी। समय रहते प्रशासन ने अपनी आंखों से पट्टी नहीं हटाई, तो जटगा-पसान मार्ग पर होने वाली अगली दुर्घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर शासन और PWD विभाग की होगी।

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